A Study of the Status of Girl Children in the Context of Sustainable Development (With special reference to girls from families living below the poverty line in Madhya Pradesh)
सतत विकास में बालिकाओं की स्थिति का अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.23005928)
Keywords:
सतत विकास, बालिका, लैंगिक समानता, बाल विवाह, पोषण, स्वास्थ्य।Abstract
सतत विकास का मूल उद्देश्य आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक न्याय, समान अवसर, मानवाधिकार तथा पर्यावरणीय संतुलन को सुनिश्चित करना है। संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, बेहतर स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इस संदर्भ में बालिकाओं की स्थिति सतत् विकास की सफलता का एक महत्वपूर्ण सूचक है। विशेष रूप से गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बालिकाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, डिजिटल संसाधनों, कौशल विकास और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अनेक स्तरों पर वंचित रहती हैं। भारत में पिछले दशकों में बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा बाल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ अभी भी मौजूद हैं। यूनिसेफ के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब परिवारों तथा सामाजिक रूप से वंचित समुदायों की बालिकाएँ बहुआयामी वंचनाओं का अधिक सामना करती हैं। इसी प्रकार बाल विवाह का संबंध गरीबी, ग्रामीण निवास तथा शिक्षा की कमी से भी पाया जाता है। भारत में 20-24 वर्ष आयु की लगभग 23 प्रतिशत युवा महिलाएँ 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह या वैवाहिक संघ में प्रवेश कर चुकी थीं। यह शोध-पत्र गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की बालिकाओं की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का विश्लेषण करता है तथा सतत विकास में सरकारी योजनाओं की भूमिका एवं उनके क्रियान्वयन से संबंधित चुनौतियों को रेखांकित करता है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि बालिकाओं के समग्र विकास के लिए केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है, किन्तु शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, कौशल, डिजिटल साक्षरता, सामाजिक संरक्षण और परिवार एवं समुदाय की मानसिकता में परिवर्तन को एकीकृत रूप से लागू करना आवश्यक है।
