An Analytical Study of Financial Inclusion through Financial Technology in India
भारत में वित्तीय प्रौद्योगिकी के माध्यम से वित्तीय समावेशन का विश्लेषणात्मक अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.23005530)
Keywords:
समावेशन, वित्तीय प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्रांति, भुगतान इंटरफेस, डिजिटल साक्षरता।Abstract
यह शोध पत्र भारत में वित्तीय समावेशन के प्रसार और सुदृढ़ीकरण में वित्तीय प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल क्रांति के प्रभावी योगदान का एक गहन विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। भारत जैसे विशाल, बहुआयामी और अत्यधिक जनसंख्या वाले देश में समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुलभ, त्वरित और सस्ती बैंकिंग सेवाएं पहुँचाना सदैव से एक जटिल नीतिगत एवं ढांचागत चुनौती रहा है। पारंपरिक बैंकिंग प्रणालियों की भौगोलिक और परिचालन संबंधी सीमाओं को दूर करने में आधुनिक तकनीकों ने क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। एकीकृत भुगतान इंटरफेस, प्रधानमंत्री जनधन योजना, डिजिटल वॉलेट्स, सूक्ष्म एटीएम तथा बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट मॉडल जैसे डिजिटल नवाचारों ने देश के सुदूर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक औपचारिक वित्तीय सेवाओं का विस्तार करने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। अध्ययन प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ों के सूक्ष्म सम्मिश्रण पर आधारित है, जिसके अंतर्गत जमीनी स्तर के अनुभवों और संस्थागत रिपोर्टों का समग्र विश्लेषण किया है। अध्ययन के निष्कर्ष यह स्पष्ट करते हैं कि डिजिटल भुगतान प्रणालियों के आगमन से न केवल आम नागरिकों की वित्तीय तंत्र तक पहुँच में वृद्धि हुई है, बल्कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी पारदर्शी व्यवस्था से बिचैलियों की भूमिका भी समाप्त हुई है। शोध यह भी उजागर करता है कि पूर्ण और सर्वसमावेशी वित्तीय सशक्तिकरण के मार्ग में अभी भी कई व्यावहारिक बाधाएं विद्यमान हैं। ग्रामीण आबादी में डिजिटल वित्तीय साक्षरता की कमी, सुदूर क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क कनेक्टिविटी, तकनीकी त्रुटियाँ और साइबर धोखाधड़ी व डिजिटल ठगी का निरंतर भय आम नागरिकों को इन सेवाओं के पूर्ण उपयोग से पीछे धकेलता है। अंततः यह शोध पत्र भारत की समावेशी आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए एक सुरक्षित, बहुभाषी और सुदृढ़ डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु ठोस नीतिगत सुधारों तथा उपभोक्ता सुरक्षा उपायों के व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है।
