A Sociological Analysis of the Status of Triple Talaq in India

भारत में तीन तलाक की स्थिति का समाजशास्त्रीय विश्लेषण (https://doi.org/10.5281/zenodo.21787965)

लेखक

  • Dr Amit Kumar Singh ##default.groups.name.author##
  • Dr. Ravish Kumar Singh ##default.groups.name.author##
  • Dr. Durgesh Kumar Srivastava ##default.groups.name.author##

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इस्लाम, मुस्लिम विवाह, विवाह विच्छेद, तीन तलाक, आधुनिकता, कानून।

सार

यह शोध पत्र भारत में ‘तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत)’ की प्रथा का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अध्ययन करता है। अध्ययन में तीन तलाक की ऐतिहासिकता, सामाजिक असर, जेंडर से जुड़े नजरिए और कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई है। सामाजिक परिवर्तन की गति देश, काल और परिस्थिति के अनुसार निर्धारित होती रही है। संस्कृति एक गतिशील तथ्य है और वर्तमान में इस्लामी संस्कृति भी परंपरा से आधुनिकता अर्थात संक्रमणकाल से गुजर रही है। इस्लामी संस्कृति में संरचनात्मक परिवर्तन, रूपांतरण और आधुनिकता के प्रसार के परिणामस्वरूप कहीं न कहीं दबाव भी अनुभव किये जा रहे हैं। इस शोध पत्र में इस्लामी संस्कृति में महिलाओं के जीवन, परिवार के रिश्तों और व्यापक सामाजिक-आर्थिक नतीजों की चर्चा की गई है। साथ ही जेंडर से जुड़े नजरिए की भी जांच की गई है, जिसमें महिलाओं के अधिकारों, इस्लामिक पारिवारिक कानून के भीतर वर्तमान में चल रही नारीवादी चर्चाओं और इंटरसेक्शनैलिटी (अलग-अलग सामाजिक पहचानों के आपसी असर) पर जोर दिया गया है। भारत में मुस्लिम महिलाओं में अभी भी शिक्षा की प्रगति बहुत धीमी है क्योंकि लड़कियों को केवल साक्षर बनाने तथा प्राथमिक और उच्च शिक्षा तक ही यह समाज सचेत दिखाई पड़ता है। इस्लाम की कुछ रूढ़िगत धारणाएं शिक्षा के साथ ही आर्थिक प्रगति, रोजगार तथा राजनीति में सामान्यतः महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित नहीं करती। पर्दा प्रथा, कम उम्र में विवाह, तीन तलाक आदि कुप्रथाओं के कारण मुस्लिम महिलाओं का शोषण आंतरिक एवं वाह्य दोनों ही स्तरों पर दिखाई पड़ता है। दूसरी ओर 20 वीं शताब्दी में मुस्लिम महिलाओं के जीवन में अनेक परिवर्तन देखने को भी मिलने लगे हैं। आधुनिक समय में मुस्लिम महिलाएं शरीयत के अनुसार की शिक्षा या धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक एवं वैज्ञानिक शिक्षा को ग्रहण कर अपनी स्थिति को बदलने के लिए तत्पर दिखाई पड़ रही हैं। परिवार और समाज के स्तर पर धीरे-धीरे मुस्लिम महिलाओं ने अपने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास को उन्नत करना प्रारंभ कर दिया है।

##submission.authorBiographies##

  • Dr Amit Kumar Singh

    Assistant Professor (Sociology), Goswami Tulsidas Government Post-Graduate College Karwi, Chitrakoot, Uttar Pradesh 

  • Dr. Ravish Kumar Singh

    Assistant Professor (Sociology), Government College Mahadeva, Umariya, Basti, Uttar Pradesh

  • Dr. Durgesh Kumar Srivastava

    Assistant Professor (Sociology), Pt. Deendayal Upadhyay Government College Saidpur, Ghazipur, Uttar Pradesh 

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प्रकाशित

2026-06-30